आईआईटी दिल्ली में आयोजित भारत @ 2047 नेतृत्व एवं वैचारिक शिखर सम्मेलन 2026 में डॉ. शशि थरूर ने प्रदान किया नेशनल आइकॉन सम्मान
उच्च शिक्षा, चिकित्सा, प्रबंधन, कानून और दिव्यांगजन अधिकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. अरविंदर सिंह को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया है। उन्हें उनकी उच्चतम शैक्षणिक उपलब्धियों और दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए निरंतर किए जा रहे प्रयासों के सम्मान में नेशनल आइकॉन सम्मान से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान आईआईटी दिल्ली में आयोजित भारत @ 2047 नेतृत्व एवं वैचारिक शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान प्रदान किया गया। प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, सांसद, लेखक, शिक्षाविद् एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शशि थरूर ने डॉ. अरविंदर सिंह को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया।
पेनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के अध्यक्ष, सामाजिक कार्यकर्ता, अर्थ डायग्नोस्टिक्स के सीईओ एवं तीन बार के विश्व रिकॉर्ड धारक डॉ. अरविंदर सिंह को यह सम्मान उनकी बहुआयामी शैक्षणिक उपलब्धियों और दिव्यांगजन अधिकारों के क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर कार्यों के लिए दिया गया।
बहुआयामी शिक्षा और उत्कृष्ट उपलब्धियां
डॉ. अरविंदर सिंह का शैक्षणिक सफर अनेक क्षेत्रों में उनकी निरंतर सीखने और उत्कृष्टता प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। चिकित्सा विशेषज्ञ होने के साथ-साथ उन्होंने प्रबंधन, विधि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, संचार और नेतृत्व सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
उनकी उपलब्धियों में भारतीय प्रबंधन संस्थान से स्वर्ण पदक प्राप्त करना भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, वे तीन बार विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर चुके हैं, जो उनकी निरंतर उपलब्धियों और बहुआयामी क्षमता को दर्शाता है।
शिक्षा और पेशेवर विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें चिकित्सा, प्रबंधन, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान दिलाई है।
चुनौतियों के बावजूद उपलब्धियों की प्रेरक यात्रा
शारीरिक दिव्यांगता की चुनौतियों के बावजूद डॉ. अरविंदर सिंह ने शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
उनकी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि चुनौतियों के बावजूद निरंतर प्रयास, शिक्षा और आत्मविश्वास के माध्यम से व्यक्ति अपने लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
उनकी उपलब्धियां विशेष रूप से दिव्यांग युवाओं और समाज के उन लोगों के लिए प्रेरणादायक हैं, जो विभिन्न परिस्थितियों के कारण अपने अवसरों को सीमित मान लेते हैं।
दिव्यांगजन अधिकारों के लिए सक्रिय भूमिका
व्यक्तिगत और पेशेवर उपलब्धियों के साथ-साथ डॉ. अरविंदर सिंह लंबे समय से दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
पेनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के माध्यम से वे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन, सुगम्यता, समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं।
उनका कार्य केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है। विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों के समक्ष वे प्रशासनिक संवाद, सूचना के अधिकार, विधिक कार्रवाई और जनजागरूकता के माध्यमों से दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का प्रयास करते रहे हैं।
Accessibility और समान अवसर की दिशा में प्रयास
डॉ. अरविंदर सिंह का मानना है कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण को केवल सहायता और कल्याण के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।
एक समावेशी समाज के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि दिव्यांग व्यक्तियों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन, बैंकिंग और अन्य आवश्यक सेवाओं तक समान पहुंच प्राप्त हो।
सुगम्यता किसी विशेष सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि समान नागरिक अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी अधिकार आधारित दृष्टिकोण के साथ वे सार्वजनिक संस्थानों और व्यवस्था में अधिक accessibility और inclusion सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
राजस्थान सरकार द्वारा भी किया गया सम्मानित
हाल ही में स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर राजस्थान सरकार द्वारा भी डॉ. अरविंदर सिंह को सामाजिक सेवा एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में योगदान के लिए राज्य स्तरीय प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
राज्य स्तर पर मिली इस मान्यता के बाद राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त नेशनल आइकॉन सम्मान उनके सामाजिक योगदान और दिव्यांगजन अधिकारों के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को एक और महत्वपूर्ण पहचान प्रदान करता है।
राष्ट्रीय सम्मान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. अरविंदर सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि दिव्यांगजन अधिकारों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक समावेशन तभी संभव है जब दिव्यांग व्यक्तियों को समाज के प्रत्येक क्षेत्र में समान भागीदारी और अवसर प्राप्त हों।
उनके अनुसार, सरकार, सार्वजनिक संस्थानों, निजी क्षेत्र और समाज को मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जहां किसी व्यक्ति को उसकी दिव्यांगता के कारण अवसरों या आवश्यक सेवाओं से वंचित न होना पड़े।
एक समावेशी भारत की दिशा में संदेश
डॉ. अरविंदर सिंह को मिला नेशनल आइकॉन सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों की पहचान नहीं है, बल्कि यह दिव्यांगजन अधिकारों और समावेशी समाज के महत्व को भी रेखांकित करता है।
उनकी यात्रा शिक्षा, पेशेवर उत्कृष्टता, उद्यमिता और सामाजिक जिम्मेदारी के संयोजन का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
दिव्यांगजन अधिकारों के क्षेत्र में उनके प्रयास यह संदेश देते हैं कि दिव्यांगता को केवल व्यक्तिगत चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी के रूप में भी समझा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
उच्चतम शैक्षणिक उपलब्धियों और दिव्यांगजन अधिकारों के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के लिए डॉ. अरविंदर सिंह को राष्ट्रीय सम्मान मिलना उनकी बहुआयामी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
चिकित्सा, शिक्षा, प्रबंधन, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां उनकी निरंतर सीखने और आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वहीं, दिव्यांगजन अधिकारों के लिए उनका सक्रिय कार्य एक अधिक सुगम, समावेशी और समानतापूर्ण भारत के निर्माण की दिशा में उनके प्रयासों को रेखांकित करता है।
यह राष्ट्रीय सम्मान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ-साथ दिव्यांगजनों के अधिकार, समान अवसर, सुगम्यता और गरिमापूर्ण जीवन के महत्व को भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से सामने लाता है।
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