पैनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स ने 13 आरटीआई आवेदनों के जरिए विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई, कुलपति ने आवश्यक सुधारों का दिया भरोसा
उच्च शिक्षा संस्थानों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए समान अवसर, बाधारहित पहुंच और समावेशी शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में डॉ. अरविंदर सिंह ने महत्वपूर्ण पहल की है। उनके नेतृत्व में पैनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स (PDRA) ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में सुखाड़िया विश्वविद्यालय में दिव्यांग सुगम्यता से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत जानकारी जुटाई।
डॉ. अरविंदर सिंह अर्थ डायग्नोस्टिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), पैनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के अध्यक्ष और तीन बार विश्व रिकॉर्ड धारक हैं। चिकित्सा, सामाजिक जागरूकता और दिव्यांगजन अधिकारों के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका के तहत यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों में समावेशी वातावरण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस पहल के तहत कुल 13 आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिनके माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर, कक्षाओं, पुस्तकालय और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित जानकारी जुटाई गई। प्राप्त सूचनाओं के अध्ययन में सामने आया कि विश्वविद्यालय में कुछ सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन बाधारहित पहुंच, दिव्यांग-अनुकूल व्यवस्थाओं के दस्तावेजीकरण और विद्यार्थियों की विशिष्ट आवश्यकताओं के आकलन जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
आरटीआई के माध्यम से विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं की समीक्षा
डॉ. अरविंदर सिंह के नेतृत्व में की गई इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों की पहचान करना और उन्हें दूर करने के लिए रचनात्मक संवाद स्थापित करना है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को समझने और आवश्यक सुधारों की ओर ध्यान आकर्षित करने का अवसर प्रदान किया।
इस पहल के माध्यम से यह महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आया कि क्या दिव्यांग विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर में स्वतंत्र रूप से आवागमन करने, कक्षाओं तक पहुंचने, पुस्तकालय का उपयोग करने और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं।
डॉ. अरविंदर सिंह का मानना है कि समावेशी शिक्षा का अर्थ केवल दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रवेश देना नहीं है, बल्कि उन्हें बिना अनावश्यक बाधाओं के शिक्षा प्राप्त करने और विश्वविद्यालय की सभी गतिविधियों में समान रूप से भाग लेने का अवसर देना भी है।
विश्वविद्यालय पुस्तकालय को भेंट कीं अपनी छह पुस्तकें
दिव्यांगता, अधिकार, आत्मनिर्भरता और समावेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से डॉ. अरविंदर सिंह ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को अपनी लिखी छह पुस्तकें भेंट कीं।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों तक दिव्यांगजन अधिकारों, समान अवसरों और समावेशी समाज के महत्व से संबंधित साहित्य पहुंचाना है। विश्वविद्यालय पुस्तकालय में ऐसी पुस्तकों की उपलब्धता से दिव्यांगता को केवल व्यक्तिगत चुनौती के रूप में देखने के बजाय अधिकार, गरिमा, स्वतंत्रता और सामाजिक भागीदारी के व्यापक दृष्टिकोण से समझने को प्रोत्साहन मिल सकता है।
डॉ. सिंह की इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि दिव्यांग अधिकारों से जुड़े विषयों को केवल सामाजिक गतिविधियों तक सीमित न रखकर शैक्षणिक और बौद्धिक विमर्श का हिस्सा बनाया जाए।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रभावी अनुपालन पर जोर
विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं की समीक्षा के दौरान दिव्यांग व्यक्तियों की सुगम्यता और उच्च शिक्षा में समान अवसरों से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का भी उल्लेख किया गया।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 दिव्यांग व्यक्तियों के लिए समानता, गैर-भेदभाव, गरिमा और समाज में पूर्ण भागीदारी के अधिकार को महत्व देता है। इस कानून की भावना के अनुरूप शैक्षणिक संस्थानों में बाधारहित वातावरण, सुगम शैक्षणिक संसाधन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
डॉ. अरविंदर सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालयों को दिव्यांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं का आकलन करते हुए अपनी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करनी चाहिए, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर केवल नीतियों और दस्तावेजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे।
इस संदर्भ में सुखाड़िया विश्वविद्यालय में दिव्यांग सुगम्यता से जुड़े मुद्दे उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी और दिव्यांग विद्यार्थियों के अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को सामने लाते हैं।
कुलपति प्रो. कैलाश डागा ने सुधार का दिया भरोसा
इस पहल के दौरान मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा ने आवश्यक व्यवस्थाओं में सुधार और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुपालन की दिशा में उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
यह आश्वासन विश्वविद्यालय में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और समावेशी शैक्षणिक वातावरण को मजबूत बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा सकता है।
समावेशी उच्च शिक्षा के लिए डॉ. अरविंदर सिंह की पहल
डॉ. अरविंदर सिंह का मानना है कि दिव्यांग अधिकारों की प्रभावी पैरवी के लिए जागरूकता, संस्थागत जवाबदेही और निरंतर संवाद आवश्यक हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम जैसे कानूनी माध्यमों का उपयोग करके सार्वजनिक संस्थानों की व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त करना और सुधार के लिए रचनात्मक प्रयास करना सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पैनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के माध्यम से की गई यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों को अधिक सुलभ, जवाबदेह और समावेशी बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
सुखाड़िया विश्वविद्यालय में दिव्यांग सुगम्यता को बेहतर बनाने की यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि शिक्षा के क्षेत्र में समानता सुनिश्चित करने के लिए केवल प्रवेश के अवसर पर्याप्त नहीं हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों को स्वतंत्रता, समानता और गरिमा के साथ शिक्षा प्राप्त करने तथा अपनी प्रतिभा और क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने के समान अवसर मिलना भी उतना ही आवश्यक है।
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